Saturday, December 19, 2009

प्यार या उलझाव ?

स्वस्थ प्रतिक्रिया  -
अजय को उसके मित्र ने एक इलेक्ट्रिक शेवर  गिफ्ट  किया  जो  वह  आमेरिका  से लाया  था  . मेने  पूंछा  , ' अजय , कैसे महसूस कर रहे हो विदेशी रेज़र से दाड़ी बना कर?'
वह बोला ,'यार,दाढी तो बन जाती है पर मजा नहीं आता ,जैसे टोइलेट पेपर को इस्तेमाल करके पूरा आनंद नहीं आता. अपन को तो देसी रेज़र ही भला.'
अस्वस्थ प्रतिक्रिया -
मोनू को पंजाबी खाना पसंद  है और चाइनीज खाना उसे बिलकुल नहीं भाता. उसके एक जानने वाले ने एक पार्टी दी जिसमे खाना चाइनीज था. बस फिर क्या था, पूरी पार्टी के दौरान मोनू चाइनीज खाने की बुराई करता रहा. हालाँकि रेस्त्र्रा का स्टाफ और माहोल बड़ा अच्छा था पर मोनू ने उनकी कमी निकलने मै कोई कसर नहीं छोडी. उसने न सिर्फ पार्टी का माहोल ख़राब किया बल्कि अपने होस्ट को भी परेशानी मै डाला.

अजय और मोनू दोनों ने लगभग एक सी स्थिती का सामना किया -'जो उपहार उन्हें मिला वो उन्हें पसंद नहीं था'. पर दोनों की प्रतिक्रिया बिलकुल उलट थी. इनमे ये अंतर  थे-

१.अजय ने अपनी नापसंगी जाहिर करते समय दूसरे की पसंद मै कमी नहीं निकाली जबकि मोनू ने ऐसा ही किया.
२. अजय ने अपनी नापसंदगी को कोई मुद्दा न बनाते हुए स्वाभाविक रूप से टिप्पणी की,जबकि मोनू ने अपनी नापसंदगी को ही ख़ास मुद्दा बना कर चुभती  हुई  बातें की.

हमें जीवन में क्या मिलता है ये हमारे हाथ में नहीं, पर हम उस घटना पर क्या प्रतिक्रिया करे, ये पूरी तरह से हमारे हाथ में है. फिर क्यों कुछ लोग जीवन में हर छोटी - बड़ी घटना को सहजता से ले लेते हैं और क्यूँ कुछ लोग उन्हें ही मुद्दा बना कर माहौल ख़राब करते रहते है, खास कर जब कोई बात उनके मन की न हो.

असल में अगर हम अन्दर से कुछ कमी महसूस करते हैं और असुरक्षा तथा अविश्वास से भरे होतें है तो हमारी प्रतिक्रियाए भी स्वस्थ नहीं होती. कमी का यह अहसास कुछ ख़ास लोगों मै ही हो ऐसा नहीं है. अधिकतर लोग कमोबेश इस अहसास से गुजरते रहते है. ये एक बीमारी की स्थिति है. अग़र किसी के सामने ऐसी स्थिती अक्सर आती है तो उसका इलाज जरूरी है.

पर अफ़सोस, जब हम खुद इस स्थिति से गुजरते हैं तो हमें यह पाता ही नहीं चल पाता है कि कुछ गलत हो रहा है. पर जब हम बार बार अस्वस्थ प्रतिक्रियाएं करते है तो हमारे जानने  वाले हमारा सामना करने से बचते है. अगर हम अपने आप नहीं सुधारते तो लोग पीठ पीछे हमें तरह-तरह के नामों से बुलाना शुरू कर देते हैं.

जब तक आइना सामने न हो हम अपने आप को नहीं देख पाते, पर दूसरे हमें देख सकते हैं.
क्या आप किसी अपने को इस तरह की अस्वथता में घिरा देखते है?
अच्छा होगा अगर ऐसे मै हम उन से उलझाने की बजाय उन्हें वो दे जिसकी उनको सबसे ज्यादा जरुरत है - प्यार और विश्वास.    
चित्र -आभार - Pleasure Gait Farms
           

No comments:

Post a Comment