Wednesday, April 28, 2010

घोटालों को घोट कर पी जाने की कला

IPL का महा घोटाला अब धीरे धीरे ठंडा पड़ने लगा है. हमाम के नंगो ने एक दूसरे को नंगा कहना बंद कर दिया है. पिछले कई घोटालों की तरह इस बार भी हमारी जनता इस घोटाले को घोट कर पी ही जायेगी. जाँच की लीपापोती होने तक असल मुद्दे और असली दोषी गायब होने का कोई न कोई बहाना ढून्ढ ही लेंगे. सालों बाद कुछ बलि के बकरे मिल भी गए तो हमारा सुस्त और लाचार कानून उन्हें गुदगुदगी भर कर के छोड़ देगा.

घोटालों के हम अब आदी हो गए है. एक नशेड़ी की तरह अब हमें बड़े से बड़ा या नए से नया  घोटाला ज्यादा देर तक किक नहीं दे पाता. मीडिया इस बात को अच्छी तरह से पहचान चुका है औत नए नए मुद्दे थोड़ी थोड़ी देर  के  लिए  परोसरा रहता है.

 इस देश के तीस करोड़ लोग दो वक्त की रोटी कमाने के लिए रोज संघर्ष करते है. बाकी कई करोड़ मिडिल क्लास का चोगा ओढ़ कर अपनी इज्जत बचाने में लगे रहते हैं. हजारों से  ज्यादा रुपये इन्होने सिर्फ फिल्मों या किताबों में देखे सुने होते हैं.  अपनी रोजमर्रा  की जिन्दगी में चंद रुपयों की झलक भर देख लें तो इनके लिए जशन का सा माहौल   होता है. करोडो और अरबों रुपयों का खेल इनकी समझ से परे है. कौन कितने करोड़ रुपये डकार गया ,इसकी दिलचस्पी इन्हें बस चुटकी लेने तक ही है. इसके बारे में ज्यादा सीरियस होना या खोज पड़ताल करने कि फुर्सत इन्हें मीडिया के उकसाने पर भी नहीं.

जनता का काम इस विश्वास से चल ही  जाता है कि बड़े ओहदे पर बेठे नेता, अफसर और व्यापारी सब कुछ उनके भले के लिए ठीक तरीके से कर रहे होंगे. जो गलत करते होंगे उन्हें कभी न कभी कानून के लम्बे हाथ दबोच ही लेंगे.

पर कोई भी पद मिलने पर ज्यादातर लोग उससे रुपये कमाने की योजनाये पहले ही बना कर रखते है. और कानून के हाथ लम्बे जरूर है पर वो बिचारा अँधा और लाचार भी है और बड़ी सुस्ती चल से चलता है.इससे छोटे मोटे मच्छरों का ही शिकार हो सकता है ,आदमखोर शेर का नहीं.

कोई भी बड़ा  घोटाला दो चार  लोगों के बेईमानी  करने भर से नहीं हो जाता. इसे बढ़ावा देते हैं इसमे शामिल हजारों  लोग जो छोटी छोटी गलतियों को देख कर भी अनदेखा करते है. 'इतना तो चलता है' के चक्कर में इतना इतना कर के हम सब मिल कर कितना खो देते है ये अहसास जब तक होता है 'चिड़िया खेत चुग चुकी' होती है.

आज जरूरत इस बात की है कि इमानदारी से पैसा कमाकर  दिखाने वाले लोग आगे आयें और लोगों के मन से इस सड़े हुए विश्वास को निकाल फेंके कि पैसा सिर्फ बईमानी से ही कमाया जा सकता है.

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