Tuesday, June 22, 2010

कुछ तो लोग कहेंगे ....




बचपन में एक कथा सुनी थी शिव, पार्वती और उनके वाहन नंदी बैल के बारे में.

कथा यूँ है की एक बार ये तीनो धरती पर मानव रूप में हालात  का जायजा लेने के लिए आए.

एक गांव से तीनो जा रहे थे तो कुछ लोगों ने उन्हें देख कर कहना शुरू कर दिया ,’देखो कैसे लोग है,साथ में वाहन (यानी नंदी बैल) है पर फिर भी पैदल चल रहे है.’. उनकी बातें सुनकर दोनों लोग (शिव-पार्वती) नंदी पर सवार हो गए.  कुछ ही दूर चले होंगे की उन्हें फिर लोगों के बोल सुने पड़े, ‘अरे कैसे जालिम लोग है, बूढ़े बैल पर दो- दो लोग सवार है, बेचारे को मार ही डालेंगे. चलो औरत सवारी करे तो ठीक, मर्द को बैल पर बैठने की क्या जरूरत.’

इस पर शिवजी ने सोचा –शायद इनकी बात में दम है और वो बैल से उतर कर पैदल चलने लगे. थोड़ी देर में फिर उन्हें लोगों के कमेन्ट मिलाना शुरू हो गए (लोग और कुछ दे न सके पर कमेन्ट जरूर मुफ्त में देकर आनंदित होते है वो भी खूब सारे).’ देखो कितनी बेशर्म औरत है, बूढा पति पैदल चल रहा है और खुद बैल पर बैठी है.क्या जमाना आ गया है !’ ये साब सुनकर पार्वती उतर गयी और जिद करके शिव को बैल पर बैठा दिया. अब कमेन्ट सुनाने की बारी शिव की थी,’कैसा मर्द है, नाजुक औरत को पैदल चला रहा है और खुद सवारी कर रहा है. घोर कलयुग आ गया है .’ भोले शिव को क्रोध आ गया और उन्होंने नंदी बैल को अपने कंधे पर उठा लिया. पर लोगो को चैन कहाँ! बोलने लगे,’ कैसा पागल इंसान है,बैल की सवारी करने की बजाय उसकी सवारी बन रहा है.’

कहानी का सार ये कि आपको अपने फैसले लोगों की बातों में ही आकर नहीं कर देने चाहिए. आप सबको किसी भी हाल में खुश नहीं कर सकते.

लोग अगर आपकी आलोचना कर रहे है तो आपका प्रयास उन्हें खुश करने का नहीं होना चाहिए, जिससे वे आलोचना करना बंद कर दें. इन लोगों को धन्यवाद करके इसको एक मौके कि तरह देखना चाहिए और हमारा प्रयास अपने फैसले को एकबार फिर जांचने का होना चाहिए. फैसला अगर खरा होगा तो हर बार जांचने पर सही ही दिखाई देगा. अपना फैसला लेने वाले आप ही अंतिम व्यक्ति होने चाहिए .अपनी यह ताकत दूसरों के हाथो में दे देना तो मूर्खता होगी.  अपने बारे में सबसे सही जानकारी तो आपको होनी चाहिए और अपने फैसलों को निभाना भी तो आपको ही है.

लोगों का क्या है. उन्हे आपकी जरूरतों और मजबूरियों का क्या गुमान ! वो तो कुछ भी कह गुजरेंगे. किसी शायर ने क्या खूब कहा है, ‘कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना..’

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