Sunday, July 18, 2010

बैक सीट ड्राइविंग




मेरी पत्नी को ड्राइविंग नहीं आती, न ही उनकी उसको सीखने में कोई दिलचस्पी है. पर कार की पिछली सीट (कभी कभी अगली को–ड्राइवर सीट, जब कार में हम दोनों ही होते हैं) पर बैठ कर कार चलाने का जो उनका जज्बा है वो कबीले तारीफ है. लगता है भगवान ने उन्हें कोई अद्रश्य रिमोट कंट्रोलर दिया है जिससे कार का सञ्चालन आसान हो जाता है.



जब मैं कार चला रहा होता हूँ और श्रीमतीजी भी साथ हों तो न तो मैं एफ ऍम रेडियो का लुत्फ़ ले पता हूँ और न ही ट्रेफिक का शोर मुझे सुनायी पडता है. इसका कारण यह है कि मुझे अपने कानो का एंटीना एक लगातार चलने वाली आवाज की धारा पर फोकस करना होता है जो देवी जी के मुंह से निकल रही होते है. इस धारा में आदेश ,आलोचना, हिदायत, टिप्पणी और बात चीत सभी के अंश बड़ी खूबसूरती से पिरोये होते हैं .ये किसी टीवी चेनल के मनोरंजक सीरियल से कम नहीं होता मगर मेरी मजबूरी इतनी है कि इस सीरियल को मैं अपनी मर्जी से बदल नहीं सकता और ना ही इसे बंद कर सकता हूँ (मुझमें इतनी हिम्मत कहाँ?). मुझे ये प्रोग्राम न सिर्फ झेलना पडता है बल्कि खेलना भी पडता है और बीच बीच में पूंछे हर सवाल पर मुझे उम्मीद के मुताबिक जबाब भी देना होता. मै तो लगता है कि KBC (कौन बनेगा करोडपति) की हॉट सीट पर बैठा निरीह कंटेस्टेंट हूँ .

हमारे देश में खुली सड़क पर कर चलाना किसी अभियान से कम नहीं होता. कितनी ही समस्याओं से हमें जूझना पढ़ सकता है. रोड में गढ्ढे होना ,ट्राफिक साइन का न होना और होने पर भी अधिकतर वाहन चालकों का उनकी परवाह न करना ,घंटो जाम लगा रहना आदि तो तो मामूली समस्याए हैं ही, कभी कभी इनमें से कुछ समस्याए इतनी घातक और विकराल रूप धारण कर लेती है कि जान पर बन आती है जैसे हाई वे पर तेज स्पीड कार के सामने अचानक किसी प्राणी (मनुष्य या भेंस, कुत्ता,बकरी आदि) का प्रकट हो जाना, नशे की झोंक मे गाड़ी हांकते किसी वहन चालक से सामना हो जाना, मैन होल या नाले का मुंह का खुला होना आदि .



ऐसी किसी समस्या के अचानक आ जाने पर मुझे अपने ध्यान और दिमाग को उस पर केंद्रित करने की जरूरत होती है. पर शीमती जी ऐसे मोके पर मुझसे मेरा ये हक भी छीन लेती है और ऐसी भयानक चीख पुकार करती हैं कि उनके इस होरर शो पर मेरा ध्यान अपने आप ही चला जाता है और सामने आयी समस्या से कुछ हट जाता है . और अगर ऐसे में कुछ गलती हो जाय तो मेरी आलोचनाओ का पिटारा वही खुल जाता है जो आगे के सफर को और दूभर कर देता है.



श्रीमती जी के मुताबिक मै एक अच्छा ड्राइवर नहीं हूँ.



क्या आपकी अर्धांगिनी भी ऐसा ही सोचती हैं? या अगर आप महिला हैं तो आप भी अपने पति के साथ ऐसा ही सलूक करती है? या अगर आप विवाहित नहीं हैं तो क्या अपने कहीं ऐसा नजारा देखा है?



ऐसी समस्या विवाहित जोड़ो के साथ हो ऐसा नहीं है. ये तो किसी भी जोड़े के साथ हो सकती है चाहे वो बिज़निस पार्टनर हों या दोस्त .



पता नहीं मुझे अपने इस कष्ट से कब मुक्ति मिलेगी ?



जब देश का प्रधान मंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति इस यातना को झेल सकता है तो मै तो एक अदना सा आदमी हूँ!

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