Tuesday, May 31, 2011

त्रिदोष



पिछले साल मैंने अपना मकान बनवाया. उसमे लगाने के लिए बाज़ार से ५ ceiling fan लाया. Electrician व्यस्त था इसलिए उसने अपने चेलों का एक झुण्ड भेज दिया ताकि पहले चरण का कम यानी assembling पूरा हो सके. सभी लोगों ने हॉल में बैठ कर पैकेट खोलना शुरू कर दिया. तभी हमारे प्रिय मित्र श्री विजय कुमार तायल जी का आगमन हुआ .वे इंजीनियरिंग के पंडित हैं. आते ही उन्होंने सभी लोगों को एक एक fan का सामान लेकर अलग अलग कमरे में भेज दिया जहाँ वो fan लगने थे. मैं बोला, ‘भाई बच्चे अगर मिल कर काम कर लेते तो तुम्हारा क्या जाता ,रौनक भी लगी रहती. क्यों उन्हें अलग कर दिया ? ’ उन्होंने fan की ३ पंखुड़ियों का एक सेट लिया और मुझसे पूंछा , ‘क्या ये तीनो बिलकुल एक जैसी है ?’ मैंने कहा , ‘लगता तो ऐसा ही है’. इस पर वो बोले, मित्र ,इन तीनोँ के आकार में मामूली सा फर्क है. इस फर्क को aerodynamics के सिद्धांतों के अनुसार डाला जाता है ताकि पूरा सेट dynamically balanced रहे. इस तरह design किये गए पंखे की हवा असरदार रहती है और कमरे के कोने कोने तक पहुँचती है. अगर पंखुडियों का सेट ठीक से design नहीं है तो बस उसकी पंखुडियां घूमती दिखाई देंगी पर हवा का लुत्फ़ सब तरफ ठीक से नहीं मिलेगा. इसे सुन कर हमारे जहन में कुछ TV Ad घूम गए जो अपने अपने ब्रांड के पंखों की खासियत इसी फर्क के आधार पर बताते हैं.

अब हमारी समझ में आ चुका था कि किस तरह तायल जी नें हमें सभी पंखुड़ियों के गलती से मिक्स हो जाने के खतरे से हमें बचने के लिए ही उन लोगों को अलग किया था.

हजारों साल पहले इसी तरह का ज्ञान इंसानी जीवन के सन्दर्भ में अपनाकर आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का अविष्कार हुआ था . आयुर्वेद में माना गया है कि इंसानी शरीर तीन दोषों से युक्त है- पित्त ,कफ और वात. हर इंसान के लिए इन तीनो दोषों का एक natural composition होता है. जब तक शरीर में यह composition बना रहता है शरीर अपने काम (चाहे कोई भी हो) आसानी से करता रहता है और वांछित फल मिलते रहते है. इस composition के बिगडते ही जीवन में स्वास्थ्य और सहजता भी बिगड़ जाती है. ऐसी स्थिति में मामूली से काम के लिए भी अथक प्रयास के बाद भी वांछित फल नहीं मिलते.

एक आयुर्वेदिक चिकित्सक पहले अपने मरीज के त्रिदोष के natural composition का पता लगता है और फिर उसे वापस संतुलन में लाने के उपाय करता है.

नयी सभ्यता के दौर में ये अनूठी चिकित्सा विधि कही गुम होती जा रही है. पर बाबा रामदेव ,डाक्टर दीपक चोपड़ा ,श्री श्री रविशंकर जैसे लोगों ने इसकी तरफ काफी लोगों का ध्यान खीचने में सफलता पाई है.

क्या आपने कभी इस तकनीक से इलाज करने के बारे में सोचा है?

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