Friday, September 13, 2013

मामूल के खिलाफ

सुरक्षाकर्मी या किसी जासूस को अक्सर किसी मामूली सी लगने वाली बात को पहचान कर उसे आधार सूत्र बना कर भयानक भाग दौड़ में लगे अपने फिल्मों और कहानियों में देखा होगा.
दरअसल इन लोगों को प्रशिक्षित ही इस तरह किया जाता है कि इनकी नज़र हमेशा ही उस चीज़ को ढूँडती रहती है जो ‘मामूल के खिलाफ’ हो. मामूल का अर्थ है सामान्य या सामान्यतः. अगर कोई  घटना या वस्तु उस हालत में दिखाई देती है जिस तरह से उसे सामान्यतः नहीं होना चाहिए तो हमारे शरलक होम्स , मेजर बलवंत या करमचंद जासूस या किसी शॉपिंगमॉल, एअरपोर्ट आदि पर लगा सुरक्षाकर्मी के दिमाग में बिजली सी कौंध जाती है .
अपने आस पास अपने कई पात्र या चरित्र भी इसी तरह की हरकतें करते शायद आपने देखे होंगे. हम सभी इस तकनीक का इस्तेमाल अपने जीवन में कभी न कभी करते ही हैं. खासकर अपने विशेष अहमियत रखनेवाले परिचितों पर या फिर घर या आफिस की चीजों/ घटनाओ पर. कुछ लोग इन्हें बढ़ा चढ़ा कर या नमक मिर्च लगा कर और लोगों को बता कर मज़ा लेते है.
इसी सूत्र को हम अपने जीवन में भी उतार कर स्वयं पर प्रयोग करें तो अनेक लाभ हो सकते हैं. क्रोध और डर के प्रभाव में आकर अक्सर हम अटपटी हरकतें करने लगते है और मामूल के खिलाफ चले जाते है. अगर हम इन घटनाओ को सही समय पर (होते हुए) पहचानना सीख लें तो बड़ी मुसबतों से बचा जा सकता है.

जीवन में हम अपने कर्मों को खुद चुनते है और अपने भाग्य का निर्माण करते है. अगर अपने जीवन में अनुशासन ला कर हम मामूल को पकड़ कर रखें और वासनाओं से दिग्भ्रमित न हों तो जीवन बड़ा सरल बन जाता है.