Sunday, February 16, 2014

बाबा गिरी का धंधा कभी ना होगा मंदा

अगर आप इस महान देश में कोई ऐसा धंधा करना चाहते है कि ‘ हींग लगे ना फिटकरी और रंग भी चोखा आये’ तो ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है . बस आपको भगवा या सफ़ेद कपडे पहनना है और दाढ़ी बढ़ानी है (अगर आप महिला है तो इस झंझट से भी मुक्ति है )बस फिर कोई फैंसी सा नाम रखना है और प्रवचन देना शुरू कर देना है.
कोई पूंछता है ये प्रवचन क्या होता है? अरे प्रवचन नहीं जानते? प्रवचन माने लच्छेदार बातें जैसी आजकल कितनी ही टीवी चेनलों पर दिखाई देती हैं. अगर आप थोड़ी बहुत बाजीगरी की ट्रिक्स भी जानते हैं तो फिर सोने में सुहागा है क्योंकि चमत्कार को तो हर जगह ही नमस्कार है.
इस धंधा में भक्त गण अपने आप प्रकट होने लगते है. इस महान देश में इंसानों की ही तो भरमार है. जितने ज्यादा भक्त आपके पास आएंगे उतना ही आपका धंधा चलेगा. आपको कुछ विशेष करने की जरूरत नहीं है. बहुत से भक्तो में से कुछ एक्टिव किस्म के जीव आपके आस पास मंडराने लगेंगे और ऐसी ऐसी व्यवस्थाये पैदा कर डालेंगे कि चढ़ावा बढ़ता ही जायेगा. आपको इस चढ़ावे को भी हाथ लगाने की जरूरत नहीं है ,बस दो चार विशेष भक्तो को अपनी जो भी जरूरत है बता देना है. आपकी हर इच्छा अपने आप ही पूरी होने लगेगी.
क्या कहा? आपके पास भला लोग क्यूँ आएंगे?
मित्र, यहाँ अमीरों के पास इसना पैसा है और उन्होंने अमीरी के चक्कर में इतने पाप कियें है की उनको तो चढ़ावा देना ही है चाहे प्राश्चित के लिए या फिर जैकपोट मिलाने की खुशी में . वो तो बस भगवान् के किसी एजेंट को ढूंढते ही रहते है. अगर आप ने दूकान नहीं खोली तो पड़ोसी बाजी मार सकता है.
और गरीबो का हाल और विचित्र है. उनकी जो इच्छा सीधे रस्ते पूरी नहीं होती उसके लिए वो शोर्ट-कट तलाशते ही रहते है- कभी इस दर पर तो कभी उस दर पर . आखिर कोशिश करने में जाता ही क्या है? और फिर उनके पास खोने के लिए ज्यादा कुछ है भी नहीं. आस बहुत बड़ी चीज है जनाब.

आयी क्या बात समझ में??

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