Sunday, November 26, 2017

बहाना


जन्मदिन तो एक बहाना है
यारों को बुला के पार्टी मनाना है
केक खाना और खिलाना है
और इसी के साथ अपनी कविता भी तो सुनाना है

कहाँ से आये और कहाँ जाना है
जिंदगी हकीकत है या फ़साना है
इन सवालों को दरकिनार करे हमें तो
हंसते खेलते जिन्दगी जिए जाना है

इधर उधर की खबर सुनना सुनना है
हसरतों और ख्वाहिशों के बारे में बतियाना है
और इन सब के बीच में हाले दिल को भी तो छुपाना है

अपनों से मिलाना मिलाना है
टूटते हुए रिश्तों को बचाना है
उम्र का क्या है, साल दर साल उसे तो बढ़ते ही जाना है

धन्यवाद आपका, मुझे कहने का मौका दिया
एक मेहरबानी और कर  दीजिये
कविता ख़त्म हो गयी है
अब आप लोगों को

तालियाँ बजाना है तालियाँ बजाना है

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