रचना प्रकाशन

मेरी एक रचना 'हिचकी ' पत्रिका में प्रकाशित हुई


नेताजी


हमने अपने फुटबॉल क्लब के फ़ाइनल मैच में
स्थानीय नेताजी को मिन्नत कर के बुलवाया
उन्हें समारोह का मुख्य अतिथि बनाया और
पुरे डेढ़ घंटे का मैच भी दिखलाया

खेल ख़त्म होने के बाद
हमने उन्हें माइक पकड़ाया
पर वहां भीड़ को देख कर
वो जा कह गए
उससे हमारा सर चकराया

उन्होंने कहा,'मुझे बताया गया की इस प्रतियोगिता में बहुत सी टीम खेलने आईं है.'
पर मेरा दिल व्यतिथ है ये देख कर कि सिर्फ दो ही टीम फ़ाइनल में पहुँच पाईं है. 
मैं कल ही खेल मंत्री से मिलूंगा
और ऐसी व्यवस्था कर दूंगा
कि ज्यादा से ज्यादा टीम फ़ाइनल खेल पाएं
दलितों और वंचितों की की कोई भी टीम इससे वंचित न रह पाएं

उससे भी ज्यादा  तकलीफ मुझे यह देख कर हुयी
कि बाइस  खिलाडियों के बीच एक ही थी मुई

ये देख कर मेरा मन भीतर ही भीतर सड़ रहा है कि
इतने सारे लोगों को एक ही फुटबाल से काम चलना पड़ रहा है.

मंत्री जी से कह कर ऐसी व्यवस्था कराऊंगा
कि अगली बार जब मैं यहाँ आऊंगा
तो हर एक खिलाड़ी को अपनी अपनी
फुटबाल से खेलता पाऊंगा

मैं तो आपका सेवक हूँ
क्या अपने लोगों के लिए इतना भी न कर पाऊंगा?

दर्जी


बाज़ारीकरण के इस दौर  में बेचारे
दर्जी कहीं खोते जा रहे हैं
और हम सिले हुए कपड़ों की जगह रेडीमेड कपड़ों के 
आदी होते जा रहे हैं

और फिर  हमारे रिश्ते भी तो
आजकल रेडीमेड कपड़ो कि तरह हो गए है
इसकी भीनी भीनी सी खुशबू कहीं उड़ चुकी है
इनमें गुंथे हुए अरमान कहीं खो गए है

जो पसंद आ गया तो खरीद डाला
जब तक मन भाया रगड़ डाला
लो हो गयी लाइफ झिंगालाला

इस्तेमाल के बाद बासी खबर की तरह किसी कोने में गुम हो जाते हैं
मर मर के जिन्दा तो रहते हैं पर नज़र कहीं नहीं आते हैं
इस तरह नए आने वाले रिश्तों के लिए जगह बनाते हैं
और ज़िन्दगी की गाड़ी को आगे बढ़ाते हैं

अगर आपकी जेब में पैसा है
तो आप इस लुप्त होती प्रजाति को भी पाल सकते हैं
जो आपकी पर्सनाल्टी में जान डाल सकते हैं
इनके दम पर आप बड़े ठाठ से रहते हैं
पर अमीरों की दुनियां में
इन्हें दर्जी नहीं डिज़ाइनर कहते हैं


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